अपनी तर्जनी से, सहलाने का बहाना ढूंढता हूं,
तेरी आंखों से,मोती छलकाने का बहाना ढूंढता हूं।
जी भरता ही नहीं, तुमसे, थोड़ी सी शरारत करके,
अपनी कुर्ते में,बटन टंकवाने का बहाना ढूंढता हूं।
ये मन तुम्हारे आने के बाद ही , बहकना सीखा है,
स्वयं ही स्वयं को समझाने का, बहाना ढूंढता हूं।
चंपा हो,चमेली हो,दिल चमन की महकती कली हो,
व्याकुल भौंरा बन, गुनगुनाने का, बहाना ढूंढता हूं।
लोग जानते है मेरी आशिक मिजाजी का आलम,
अपने जैसा ही तुम्हें बनाने का, बहाना ढूंढता हूं।
तुम ठहरी मासूम,भोली -भाली,शरमाती हुई लाजवंती,
कोमलता की फुहारों में,भीग जाने का बहाना ढूंढता हूं।
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