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अधूरी दास्तान

                
                                                         
                            अधूरी दास्तान
                                                                 
                            

कुछ अधूरे ख्वाब,
कुछ अधूरी दास्तान,
कुछ अनकहे सपने।

एक दफा तो सब खत्म
होने का मलाल देते हैं।

पर वक्त का मरहम भी,
ज़ख्म भरने की कोशिश करता है।

एक रोज़ यही अधूरे ख्वाब,
दास्तान और सपने जिंदगी,
को नया मकसद देते हैं।

आसान नहीं होता
अधूरी दास्तान के साए में जीना,
बहुतों को यह
खुद में समा लेती है।
आसान नहीं होता
इससे आज़ाद होना।

दास्तान जितनी गहरी,
रास्ता उतना ही साफ़ होगा।

पर अधूरी दास्तान के साथ जीना भी,
एक बेमिसाल जुनून होता है।

अगर सारे ख्वाब पूरे हो जाएँ,
अगर सारे सपने पूरे हो जाएँ,
अगर मेरी दास्तान ही नहीं हो,
तो जीवन कैसा होगा?

— मनोज कुमार यादव
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

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