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मुझे गाँव में रहने दो

                
                                                         
                            बना बीज अंकुरित हुआ,
                                                                 
                            
पौधा बन लहराने दो,
आगे भी में फल दूंगा,
मेरे गांव में रहने दो l (1)

पुरखों की यह भूमि मेरी,
कई पीढ़ी से सींची है,
आती है खुसबू उनकी इसमें,
मुझको भी जी लेने दो l (2)

इस माटी से बना हुआ में,
इसमें मेरी शान है,
जान बसी है इसमें मेरी,
इसमें मुझको रहने दो l (3)

जीव जंतु और खेत खलिहान,
मेरे मित्र अटूट सामान,
दिन दो - चार बचा है जीवन,
खुशी - खुशी यो जीने दो l (4)

माटी नहीं ये जीवन मेरा,
कई पीढ़ी की शान है,
कुछ पलों का मेहमान जग में,
मुझको यहाँ तुम रहने दो l (5)

हुई बरखा, उठि खुशबु थी,
मेरी रगों में दौड़ रही,
खुला आकाश और शुद्ध हवा में,
मुझको तुम जी लेने दो l (6)

माँ बाप का प्यार इसी में,
सारे जग का लाड इसी में,
स्वर्गो सी सुंदरता इसी में,
मुझको संग इसके रहने दो l (7)

यादें इसी से बातें इसी से,
बड़ी - बड़ी चाहते इसी से,
वंशो की उम्मीद इसी से,
अनगिनत है ख्वाब इसी से l (8)

भाई चारे प्यार से,
मिल जुलकर रहने दो,
शान शौकत बड़ी पुरानी,
उसकी कहानी कहने दो l (9)

नहीं चाहिए दौलत शोहरत,
गज दो गज में रह लूंगा,
मत भेजो मुझे वृद्धा आश्रम,
बचा समय यहाँ सह लूंगा l (10)
-मनोहर सिंह जामलिया
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3 घंटे पहले

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