अंजान थे
तो सुकून था
सब जान कर
हलकान हुए
दूर थे
तो करीब थे
मिल कर
रकीब हुए
मौन थे
तो गज़ल थे
बखान कर
दीवान हुए।
-मं शर्मा
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