रंगहीन दीवारों की
बदरंग तस्वीरें
बेमन से लिखी गईं
मानो तकदीरें
खामोश थीं कब से
कुछ कहने लगी हैं
दीवारों के क्या कान उगे
तस्वीरें बोलने लगी हैं।
-मं शर्मा
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