कर्ज़ है जीवन उधार का
चुका रहा कोई और है
मुसाफिर हूँ इसी राह का
काफिला कोई और है
खयाल हूँ किसी ख्वाब का
बुन रहा कोई और है
सवाल हूँ तेरे जवाब का
पूछ रहा कोई और है ।
-मं शर्मा
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