प्राची के दर पर
भोर की दस्तक है
रवि ने दमकाया
अंधकार का मस्तक है
दरिया के पानी में
लहरें बनी नर्तक है
जीवन हुआ चलायमान
प्रकृति का करतब है।
-मं शर्मा
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