धुंधलाती सी आँख लिए
जब से जीवन की साँझ हुए
पतझड़ कभी गया ही नहीं
मौसम आए और गए।
-मं शर्मा
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X