जानने लगा हूँ मानने लगा हूँ
जब से खुद को पहचानने लगा हूँ
मिलने लगा हूँ बतियाने लगा हूँ
जब से खुद को अपनाने लगा हूँ
हँसने लगा हूँ जीने लगा हूँ
जब से खुद को लिखने लगा हूँ
-मं शर्मा
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