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हम बेचारे अकेलेपन के मारे

                
                                                         
                            उंगली पकड़ चलना सिखाया
                                                                 
                            
जिन्हे अच्छे बुरे में भेद कराया
तोड़ के ममता के बंधन सारे
एकदिन ऊँची उड़ाने भर गए

हम बेचारे अकेलेपन के मारे
काठ की एक छड़ी के सहारे
निष्कासित से इस जीवन को
खुद ही धकेलना सीख गए।
-मं शर्मा 
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2 घंटे पहले

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