बारिश की बूँदों से नहाई
सीली सीली बयार चली
दरिया की लंबी सड़क पर
कागज़ की वो नाव चली
पार उतरी कि मंझधार डूबी
बिन नाविक बेबाक चली
लहरों के सीने भेदती
वो कागज की नाव चली ।
-मं शर्मा
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