आँगन सिमट बालकनी हुए हैं
परिवार टूटकर फैमिली हुए हैं
संस्कारों की उड़ाकर धज्जियाँ
आधुनिकता के पैरोकार हुए हैं
आँगन कट कर कमरे हुए हैं
परिवार टूटकर फैमिली हुए हैं
दिलों में उग आई हैं दीवारें
अपनों से सब दूर हुए हैं ।
-मं शर्मा
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