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बेआवाज़

                
                                                         
                            कल भी आज जैसा था
                                                                 
                            
आज फिर वैसा आज है
जाने कब से बज रहा
फिर वही साज है

ना लय है ना ताल है
ना कोई आवाज़ है
जाने कब से छुपा रहा
कोई गहरा राज़ है ।

 
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एक महीने पहले

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