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हे शिक्षक

                
                                                         
                            हे शिक्षक
                                                                 
                            

जब भी शिक्षा के मूल्यों को आँका जायेगा
तब शिक्षक तुम्हें भी याद किया जायेगा।
तुमने बच्चों को पढ़ा उनके भविष्य चुना,
तुमने चाॅक, डस्टर, बोर्ड, किताबों को,
अपना अस्त्र, अपना माध्यम बनाया ।
तुमने चारदीवारी, साज-श्रृंगार को ठुकराकर,
तुमने बच्चों के भविष्य को चुना, उसे सँवारा।
उनमें ज्ञान की लौ जला कर तुमने,
देश को अनेक बहुमूल्य रत्न प्रदान किए।
तुम वही हो जिसने आजाद को, कलाम को बनाया
तुम वही हो जिसने न जाने कितने हीरों को तराशा।
तुमने अपने बारे में कभी नहीं सोचा,
न किसी और ने तुम्हारे बारे में नही सोचा,
लेकिन जब भी बुनियाद को, ज्ञान को आँका जायेगा।
हे शिक्षक तब तुम्हें भी याद किया जायेगा।

 
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42 मिनट पहले

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