बहुत ढूँढा तब जाकर मिला था
मेरे जीवन मेँ भी खुशियों का फूल खिला था
उसकी खुश्बू सें जीवन महका था
कभी दुख नही देगा ये कहता था
और ना जाने खुदा को क्या मंजूर हुआ
वो तो मुझसे दूर हुआ
भुला बैठा मेरे प्रेम को
ना जाने किससे दिल लगा बैठा था,,,
- मंजू आस्था
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