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“इश्क़ की ढाल”

                
                                                         
                            दर्द बहुत है दिल में अब सहा न जाए,
                                                                 
                            
लेकिन हर गम किसी से कहा न जाए।
रहे एक शख्स हर किसी जिंदगी में खास
जिसके बिना एक पल भी रहा न जाए।।

दिल तुम्हारे लिए न जाने क्या-क्या चाहे
तुम्हारे सिवा अब मुझे कोई ना भाए,
क्या करें हम इस खुदगर्ज जहां में रहकर
मुकम्मल हो इश्क़ हमारा, हर तरफ़ शोर आए।।

जला उठा है समां भले ही चिराग के तले
चपल से मचल उठे जलधर बरसने को घने
मिलन हुआ है तय धरती- अंबर का यहां
हुई क्या ख़ता मुझसे, जो काँटों पर हम चले।।

कर दीदार इश्क का ,जग भी चाहे चाल चले,
तुम्हारे करीब रहना मुझे, क्षत्रिय- सी ढाल लगे।
न कर सके कोई वार ,न छल- कपट मुझ पर
मेरी हर इबादत में सदैव ईश का आशीर्वाद रहे।
-मंजू
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2 घंटे पहले

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