रूठे हैं रिश्ते,
या फिर दूर हो गए हैं सदा के लिए,
किसे पता कितने मजबूर हो गए हैं,
अहम अभिमान ने रोके हैं कदम इनके,
या फिर हालात के हाथों की,
कठपुतली बन कर रह गए हैं,
रूठे हैं रिश्ते।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X