आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

आखिर क्या लिखे

                
                                                         
                            लिखे
                                                                 
                            
लिखे न सिर्फ चाँद सितारों पर
लिखे ज़मीन पे रहने वालो पर भी
लिखे न सिर्फ मेहबूब की आखों पर
लिखे मेहबूब के संघर्ष और उसके हौसले पर भी
लिखे न सिर्फ पेड़ पे लगे फूलो पर
लिखे उनके मौन दुःख पर भी
लिखे न सिर्फ हरियाली पर
लिखे जोतने वाले पर भी
लिखे न सिर्फ कलकल बैठी नदियों पर
लिखे उनमे बह रही इंसानी गन्दगी पर भी
लिखे न सिर्फ पहाड़ो की सुंदरता पर
लिखे उनपर होरही निर्दयता पर भी
लिखे न सिर्फ भूत भविष्य पर
लिखे आज के सत्य पर भी
लिखे
लिखे न सिर्फ चाँद सितारों पर
लिखे ज़मीन पे रहने वालो पर भी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर