चिंतामन गणेश मे गुंजती भक्तों की पुकार है,
ये मेरा सीहोर है, यह मेरा सीहोर है।
1857 में, विद्रोह करती सिपाही बहादुर सरकार है।
1858 में, शहीद हुए 356 रणबाकुरों का बलिदान है।
नरसिंहगढ़ के युवराज चैन सिंह के शहादत की अमर गाथा है।
गर्व से खड़ा हुआ वीर दुर्गादास राठौड़ स्मारक है।
ये मेरा सीहोर है ये मेरा सीहोर है।
मनकामेश्वर में गुंजते हर- हर महादेव के जयकारे हैं।
हर कंकण में शंकर पाता कुबरेश्वर धाम का भक्त है।
भक्तों का मन मोहते चिंतामणि और मनमोहन पार्श्वनाथ हैं।
चंद्र प्रभु स्वामी मंदिर में चंद्रमा सी शीतलता का आभास है।
ये मेरा सीहोर है ,ये मेरा सीहोर है।
यूरोपीयन शैली से बने चर्च में हालुलुईया करता कलिसिया है।
सफेद रंग से सुसज्जित गुरुद्वारे में गाई जा रही अरदास है।
पीली मस्जिद पर लगाई जा रही फरियाद है।
ये मेरा सीहोर है ,ये मेरा सीहोर है।
हिंग की कचोडी के चटपटे जायेके का अहसास है।
सराफा बाजार में होती हर दिन की गपशप है।
बड़े बाजार में चटपटी चाट, मंगोड़े और गजक की बाहार है।
ये मेरा सीहोर है,ये मेरा सीहोर है।
सीहोर टॉकीज से लीसा टॉकीज बनने तक का सफर है।
शेहरियार हायर सेकेंडरी से एक्सीलेंस स्कूल बनने तक की यात्रा है।
हर किस्म की फसलों का अनुसंधान करता आर.ए के. कॉलेज है।
कृषि मंडी से घर-घर में पहुंचता शरबती गेहूं का स्वाद है।
ये मेरा सीहोर है, ये मेरा सीहोर है।
इतनी विविधताओं के साथ, अच्छे- बुरे वक्त में शामिल होता सीहोर के बाशिंदों का यह मिज़ाज है।
ये मेरा सीहोर है, ये मेरा सीहोर है।
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