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गाँव ढूढ़ते हैं

                
                                                         
                            गाँव में होकर भी
                                                                 
                            
बचपन वाला गाँव ढूढ़ते हैं|
वो पगडण्डी,
वो खेत और खलिहान ढूढ़ते हैं|
गाँव में होकर भी
गाँव ढूढ़ते हैं|
वह पीपल के पेड़ की
ठंडी छांव
और तालाब का
किनारा ढूढ़ते हैं|
गाँव में होकर भी
हम गाँव ढूढ़ते हैं|
वो अंगीठी की आग
वो अलाव ढूढ़ते हैं|
नन्ही चिड़िया की चहक,
माटी की महक ढूढ़ते हैं|
गाँव वे होकर भी
हम गाँव ढूढ़ते हैं|
वो पनघट, वो पनिहारन,
की अलबेली चाल ढूढ़ते हैं|
गाँव में होकर भी
हम गाँव ढूढ़ते हैं|

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4 वर्ष पहले

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