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एक मतला और एक शेर

                
                                                         
                            लोग जब भी तेरे विपरीत गवाही देंगे;
                                                                 
                            
बन के साया तेरे हम साथ दिखाई देंगे।

आपको खलने नहीं देंगे कमी भाई की;
वास्ते राखी के हम अपनी कलाई देंगे।
- मनीष 'मोहक' 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
6 hours ago

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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