नाजुक उमर का है, ये खेल सारा,
प्यार तो है एक अविरल धारा,
भटकते भंवर में, ना मिलता किनारा,
प्यार तो है, एक अविरल धारा।
गुलाबों भरी है ये फुलवारी यारा,
मधु का नशा है, तिलिस्मी नजारा।
लहर उठती रहती है सीने में हर पल,
कभी नब्ज धीमी, कभी चढ़ता पारा।
है अहसास मीठे, तजुर्बा है खारा,
ना वो हमसे जीते, ना मैं उनसे हारा।
प्यार तो है एक अविरल धारा।
जो मायूस थे, गमजदा जिंदगी में,
उन्हे प्यार ने अपने बूते उबारा।
हर एक जिंदगी में है ये दौर आता,
कोई न कोई इस दिल में समाता।
चंचल ये नजरे, करती है इशारा,
जो पढ़ ले कोई, बन जाता आवारा।
प्यार तो है, एक अविरल धारा।
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