नजर उतारने के सौ तरीके जानती है मेरी मां,
हफ्ते के एक एक दिन यात्रा पर क्या शुभ है, जानती है मेरी मां,
हमे पालने के लिए जो भी सही लगा किया,
हां, पर अपने घमंड को स्वाभिमान समझती रही मेरी मां।
जब हम नींद में रहते तो नाभि में काजल लगाती, दशहरे में,
जागने पर नाभि का काजल नही पर, आंखो मे स्याह रंग नजर आता था,
जादू टोने से कुछ इस तरह बचाती थी , मेरी मां।
बातें बदलकर बाबूजी के गुस्से से बचाती थीं,
महीने में चार बार नजर उतारती थीं,
ज्वर में सारी रात पंखे झलती,
माथे पर बिना रुके झंडू बाम मलती
मां सिर्फ शब्द नहीं, प्यार, समर्पण, त्याग है,
संसार का सबसे पवित्र रिश्ता है, मां।
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