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हां, मैं सच बोलता हूं

                
                                                         
                            हां, मैं सच बोलता हूं,
                                                                 
                            
झूटों की पोल खोलता हूं,
डरता नहीं अंजाम से,
बेइमानों की कब्र खोदता हूं,

हां, मैं सच बोलता हूं।

दोस्त कम ही है मेरे,
दुश्मनों की तादाद ज्यादा है,
हवा के विपरीत चलने का जो इरादा है,
बहती हवा का रुख मोड़ता हूं,

हां जी, मैं सच बोलता हूं।

खौफ खाते है मुझसे गैर,
अपने भी रखते है मुझसे वैर,
सच के तराजू में हर रिश्ते को तौलता हूं,

हां, मैं सच बोलता हूं।

ना तख्त है ना ताज,
बुलंद है आवाज,
सर झुका ना किसी के सामने,
इस बात का है नाज,

बरसों से दफन राज खोलता हूं,

हां, मैं सच बोलता हूं।

अगणित है पथ में बाधा,
मगर खुद से है ये वादा,
ना पीछे मुड़ के देखना,
मुझको है ये माद्दा।

रीति रिवाज की मैं जंजीर तोड़ता हूं,

हां, मै सच बोलता हूं।
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एक वर्ष पहले

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