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दो दिन की दुनिया

                
                                                         
                            जहां से हम आए वहीं को है जाना,
                                                                 
                            
दो दिन की दुनिया, मुसाफिरखाना।

ये वक्त का दरिया,
चला जा रहा है,
सभी को पता है कहां जा रहा है,
है गिनती के दिन ये,
खुशी से बिताना,

दो दिन की ये दुनिया, मुसाफिरखाना।

जिन रास्ते से गुजरे,
वो रस्ते बताए,
चला इन पे कोई है, अल्हड़ दीवाना।

दो दिन की ये दुनिया, मुसाफिरखाना।

इक ऐसी हो हस्ती,
नगर जाने बस्ती,

कोई चाहे भी तो,
हो मुश्किल भूलना,

दो दिन की दुनिया, मुसाफिरखाना।
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एक वर्ष पहले

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