अर्थ की महिमा व्यर्थ नहीं,
अर्थ नहीं सामर्थ्य नहीं।
ज्ञानार्जन भी अर्थ कृपा से,
मानार्जन भी अर्थ कृपा से।
रूप, कौशल भी अर्थ गुलाम,
बिना अर्थ इनका क्या काम।
अर्थ से बड़ी नही कोई शक्ति,
अर्थ हो जिसकी, उसकी भक्ति,
अर्थ बिना सूझे ना युक्ति।
अर्थ बिना नही मिलती मुक्ति।
अर्थ का ऐसा है, व्यहार,
कोई सगा न कोई यार,
अर्थहीन है जग का भार,
व्यर्थ है जीवन, व्यर्थ आचार....
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