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अंधेरे की औकात

                
                                                         
                            इस रात की क्या औकात, की दे दे,
                                                                 
                            
रौशन जहां को मात।

है चंद पलों का अंधियारा,
साहस इंसान का दोस्त, सहारा,

हंसते हंसते कट जायेंगे,
बस कर ले थोड़ी बात,

इस रात की क्या औकात, की दे दे,
रौशन जहां को मात।

अंधियारे से डर जाएं, क्यूं,
कायर की तरह मर जाएं, क्यूं
रहे हाथों में धरे हाथ,
इंसान की नही वो जात,

इस रात की क्या औकात, की दे दे,
रौशन जहां को मात।
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एक वर्ष पहले

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