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सारी बाधाओं, विपदाओं को पार कर सकती हूँ

                
                                                         
                            आप हर पल मेरे संग चलना,
                                                                 
                            
किन्तु परछाई बन कर नहीं,
मेरी रूह बनकर.
परछाई तो अंधेरों में साथ छोड़ जाती है,
रूह तो मौत के बाद ही जुदा हो पाती है,
आप मेरी रूह बनना...!
आप हर पल मेरे संग चलना,
धड़कन बनकर
जो हर पल सीने में धड़कता रहे आखरी वक्त तक,
जिस धड़कन में बस आप और
आपका नाम धड़कता हो,
आप मेरी धड़कन बनना...!
आप हर पल मेरे संग चलना,
सुख में, दुख में,
जीवन के हर परिस्थिति में साथ रहना,
हर सफर, हर ड़गर पर, मेरे संग चलना...!
मेरे जीवनसाथी यदि भटक जाऊँ मैं मार्ग से कभी,
तो आप मेरे मार्गदर्शक बनना,
मेरी जान, मेरे जीवनसाथी (अमित)❣️,
आप हर पल मेरे संग चलना...!
मेरी ज़िन्दगी के हर मोड़ पर मेरा साथ देना,
मैं गिरूँ कभी, तो मुझे संभाल लेना,
मैं हार जाऊँ कभी, तो मुझे हिम्मत देना,
मेरे जीवनसाथी,आप हर पल मेरे संग चलना.
आप संग हो, तो मैं दुनियाँ से लड़ सकती हूँ,
सारी बाधाओं, विपदाओं को पार कर सकती हूँ,
जीवन के हर जंग को जीत सकती हूँ,
बस आप मेरे संग रहना,
मेरे जीवनसाथी
आप हर पल, हर कदम पर,
मेरे संग - संग चलना....!
-र्वशी अमित मिश्रा
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 घंटे पहले

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