आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

आसान नहीं होता

                
                                                         
                            आसान नहीं होता अकेले आगे बढ़ना,
                                                                 
                            
उनको पीछे छोड़ देना,
जिनसे इस क़दर जुड़े हो तुम,
कि हर छोटी-बड़ी बात
सबसे पहले उन्हें ही बतानी हो।
आसान नहीं होता
उनसे अपना ध्यान हटाना,
जो आपके दिन का हिस्सा रहे हों,
आसान नहीं होता
उन लम्हों को भूल जाना,
वो बेवजह की मुलाक़ातें,
और वो ख़ामोशियाँ भी
जिनमें बहुत कुछ कह दिया था।
लेकिन शायद
ज़िंदगी का सच यही है—
कुछ लोग बस उतनी दूर तक होते हैं
जहाँ तक हमारी राहें मिलती हैं।
जिस दिन आप अपनी राह चुन लेते हो,
वही रिश्ते अजनबी से लगने लगते हैं।
इसलिए अगर कभी
अकेले चलना पड़े,
तो दर्द होगा…यादें आएँगी…
दिल भी कई बार पीछे मुड़कर देखेगा।
फिर भी चलते रहना,क्योंकि कभी-कभी
किसी को पीछे छोड़ना ,उसे खोना नहीं होता
खुद को वापस पाना होता है।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
12 hours ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर