खुशबू भरी स्याही के
स्पर्श से पन्नों में रंगत क्या आई
हंसने लगीं वादियां फिजाएं
मुस्कुराने लगीं दिल की तमन्नाएं
मन का मौसम खिल गया
दिल का माहौल बदल गया
दिल की हसरतें मचल उठीं
जब पन्नों की रूह को छूती
स्याही मंद-मंद मुस्कुराती हुई
पन्नों पर मिठास घोलती
उतरती गई
मन में खुशी के अंकुर फूटे
बरस कर खुशियां
मन की दहलीज
उत्साह उमंग से भरने लगीं
खुशियाँ बिखरीं
कुछ इस कदर कि
मन की दहलीज़ महक उठी
बिखरीं जो खुशियाँ
मन की दहलीज़ पर
मन का हर कोना
उत्सव और उमंग से
भरने लगा
मन में हर्ष का फूल खिला
मन बाग बाग हो उठा
मन की कलियां मुस्कुराने लगीं
जब स्याही पन्नों को खुशी के
रंग में भिगोने लगी
मन की कलियां यूँ
खिलखिलाने लगी
जब स्याही पन्नों पर
खुशियों के रंग बिखराने लगी
जैसे उजड़े चमन में
बहार आई हो
जब पन्नों में रंगत आई
पतझड़ में बहार आई
मन मंदिर में खुशियां छाईं
जब स्याही ने खुशियां बरसाईं
-ममता तिवारी
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