कलम हाथ में जब आती है
दुनिया संवर जाती है
सुख दुख लिखती है
सब कुछ लिखती है
ये ख़ुदा से कम नहीं दिखती
ख़ुदा का रूप लगती है।।
-ममता तिवारी
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