हर तरफ खामोशी क्यों है
आदमी आदमी से बेखबर क्यों है
हर रोज मिलते थे बच्चे
जहां खेलने के वास्ते
आज उस मैदान में सन्नाटे क्यों है
ये नये दौर के मोबाइल गेम
बच्चों को इतने लुभाते क्यों है
पहले सबको सबकी खबर थी
आज कल अपने अपनों को ही भुलाते क्यों है
हर तरफ खामोशी क्यों है
ये मंजर बदला बदला क्यों है।।
-ममता तिवारी
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