कदम बढ़ते गए
पथ आसान होते गए
राह में रुकना
कभी आया नहीं
राहों में ठोकड़े
तो बहुत लगे
लेकिन,पांव ने कभी
हार माना नहीं
पथ के कंकर,पत्थर
से डरे नहीं कभी
क्योंकि,हौसलों ने साथ
छोड़ा नहीं कभी
हां,माना मखमली
रास्ते नहीं मिले
लेकिन,इस बात का
गम नहीं सताता कभी
शूल से अनभिज्ञ नहीं
रहे इस एहसास से मन
हर्षो उल्लास से
भर जाता है अभी
आसमां की दीवानी हूं
उम्मीदें है बहुत बड़े
जंग खुद से है एक
बाकी अभी
रक्तमय पावों से,
जिगर के हौसलें से
लिखनी है रोमांचक
कहानी अभी हमें
दूर तलक तक
केवल मंजिल
दिखता है हमें
कदम बढ़ते रहेंगे
हार नहीं मानेंगे अभी।।
-ममता तिवारी
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