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कदम बढ़ते गए

                
                                                         
                            फूलों की चाहत थी
                                                                 
                            
शायद मिल जाते
कदम वहीं रुक जाते
कांटे मिलते गए
कदम बढ़ते गए।।
-ममता तिवारी
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4 महीने पहले

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