तरुवर के नीचे
एक पथिक
कर रहा था
आराम
मन ही मन
गा रहा था
प्रभु का गुणगान
यह पेड़ पौधे ही
डाल देते हैं
शरीर में जान
हे ईश्वर आपकी
महिमा महान
सुखे ना कभी
पेड़ पौधे
यही है मन में
अरमान
जब भी मैं
पेड़ का शीतल
छांव पाता हूं
आता है प्रभु
आपका ध्यान
मन शीतल
तन शीतल
हृदय पुष्प खिले
होठों पर सज जाते
मधुर मुस्कान
आपकी ही कृपा से
एक एक पते
डोलते हैं भगवान।।
-ममता तिवारी
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