सिर्फ फूलों से मुकम्मल ये जहां नहीं
यहां कांटों का भी किरदार बहुत है..
सिर्फ अपनों से हम पूरे नहीं..........
यहां गैरों का भी एहसान बहुत है..।।
-ममता तिवारी
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