आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

माफ कर दो भगवन

                
                                                         
                            माफ कर दो भगवन
                                                                 
                            
जो भूल हमसे कोई हो गई
बड़ी दुनिया में
पता नही कहा
पर ये छोटी
संतान कही खो गई।

एक कोना दिखता है
जहा पर शायद कोई
हमे लिखता है
उसी लिखावट में मैं कही खो गई
माफ कर दो भगवन जो भूल हमसे कोई हो गई।

भूल को माफ करो भगवन
साथ बस तुम हमेशा रहना
राह दिखा देना
जब कभी उस राह में मैं कही खो गई
तब भी माफ कर देना भगवन
जो भूल हमसे कोई हो गई।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर