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"धड़कन की ज़ुबान"

                
                                                         
                            ना कोई वादा, ना कोई शर्त है,
                                                                 
                            
तुझसे जो है, वो रूहानी अर्थ है।
ना पाने की चाहत, ना खोने का डर,
तेरी ही यादों में गुज़रता है हर पहर।
ये इश्क़ जिस्मों का मोहताज नहीं,
इसमें ज़माने का कोई रिवाज़ नहीं।
एक दूजे को बिना कहे सुन लेना,
है खामोशियों में भी महक बुन लेना।
जैसे ओस की बूंद पत्तों पर ठहरती है,
वैसे ही तेरी सादगी मुझमें उतरती है।
ना कोई दिखावा, ना कोई नकाब है,
मेरा ये निश्छल प्रेम, एक मुकम्मल ख्वाब है।
दुनिया ढूंढती है प्यार में फायदे और नुकसान,
पर मेरी इस प्रीत में बसता है मेरा जहान।
ना कोई मांग है मेरी, ना कोई शिकायत है,
तेरी एक छोटी सी मुस्कान ही मेरी इबादत है।
दूरी चाहे मीलों की हो या जनम-जनम का फासला,
कम ना होगा कभी मेरी इस मोहब्बत का हौसला।
तू मिले या ना मिले, ये तो मुकद्दर की बात है,
पर तेरी याद ही मेरे हर पल की सौगात है।
सांसों की डोर से बंधा एक पावन सा नाता है,
जो बिन कुछ सोचे बस निभाता चला जाता है।
यही तो है सच्ची प्रीत का असली ठिकाना,
जहाँ खुद को खोकर ही पड़ता है सब कुछ पाना।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

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