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दिल साफ, दिमाग खराब

                
                                                         
                            हँसना आदत है
                                                                 
                            
हँसाना शौक है
पर लोगों को नज़र जोकर ही आता है

पर उसकी भी कीमत कहाँ
दिल तो मेरा साफ है
दिमाग बहुत खराब है

दिमाग से करूँ बात तो ठीक है
दिल की बात लोग समझते कहाँ

हर काम धीमे-धीमे करती हूँ
गुस्से की बड़ी तेज़ हूँ
कंट्रोल भी बहुत करती हूँ
लेकिन ये मेरे बस की बात कहाँ

प्रेम से बात करती हूँ
लोग समझते कहाँ

गुस्से का ज्वालामुखी जो फूटा है
समझ लो भयंकर तूफ़ान अब आया है

गुस्सा जो देख लो मेरी आँखों में
चार फीट दूर रहना
कब क्या बोल दूँ खबर मुझे भी नहीं
-मैथिली मेहता
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10 महीने पहले

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