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ख्वाहिश

                
                                                         
                            अपनी ख्वाहिशों को पूरा करूं,
                                                                 
                            
या जिंदगी यूं ही जीती रहूं ||
यह सुनती रहूं इस दुनिया भर के तनों को,
या इन तानों से निखरती रहूं ||

कई दोस्त बने,कई लोग मिले,
कई आज भी है साथ इस सफर में ||
पर कुछ ने हमें भुला दिया,
पर जिंदगी यूं ही चलती रही ||

ख्वाहिशों को पाने में जिंदगी लगा दी,
पर यह जिंदगी अब है भी या नहीं ||
अपनी ख्वाहिशों को पूरा करूं,
या जिंदगी यूं ही जीती रहूं ||
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

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