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राजसभा

                
                                                         
                            राजसभा-२
                                                                 
                            

पासा शकुनि के धूर्त हस्त में
द्वापर का अंश शकुनि था,
दुर्योधन विनाश का पहिया
कलियुग उसके मन में था।

शकुनि के पासे में
आत्मा जीत की बैठी थी,
उसने जो अंक माँगा था
वही खुल कर आता था।

द्रौपदी एकान्त में बैठी
वह अग्नि से पैदा थी,
दूषित मन के पास उसे
खींच दुशासन लाया था।

क्यों जर्जर मन से महारथी
देख रहे थे विनाश लीला?
वह अग्नि से उपजी कन्या
श्री कृष्ण को पुकार रही थी।
- महेश रौतेला
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2 घंटे पहले

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