हर ओर आदमी का होना
छलता है हमें,
जब जनसंख्या पचास करोड़ थी
तब जेब कटी थी,
जब सौ करोड़ हुई
तब भी कटी थी,
हर ओर आदमी का होना
छलता है हमें।
-महेश रौतेला
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