ग़ज़ल: हम फल दार हैं पौधे
हम फल दार हैं पौधे,नहीं खरपतवार बनना है।
गदगद हो जाए रसना, ऐसा रसदार बनना है।
जूझना है तुम्हें सदा -सदा ही आंधी तूफां से,
सबकी हो जाए नैया पार,ऐसी पतवार बनना है।
कोई पद चिह्न चलता है,तुम्हें पद चिह्न बनाना है,
लगे चार चांद मंज़िल को,ऐसा किरदार बनना है।
बना ले लक्ष्य तू अपना सच्चा ईमान लेकर के,
जरूरतमंद लोगों का तुम्हें मददगार बनना है।
फतेह जंग तुम्हें करनी है समर हो कितना भी भारी,
चीरती चले अरि दल को ऐसी तलवार बनना है।
गुरु का मान हो ऊंचा, चुका दूं ऋण मैं उनका,
चहेता बन जाऊं सबका ऐसा समझदार बनना है।
पीढ़ियां तराशें खुद को, इशारा करके जो हम पर,
प्रतिभा के अक्स दिखें ऐसी दीवार बनना है।
चढ़ूं दुनिया की नजरों में,नहीं तलबगार बनना है।
'महेश' पूजे दुनिया सारी,ऐसा सरदार बनना है।
-महेश तंवर
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