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सिक्का संपूर्ण ही अपना..

                
                                                         
                            मेरा उदय तेरा अस्त
                                                                 
                            
तेरा अस्त मेरा उदय
स्वाभाविक है,
न तू मेरा
न ही मैं तेरा
दुश्मन हूँ.....
बस इस जहां में
संपूर्ण का हिस्सा है,

जानते है सब भक्त
लगेगा वक्त
निराश न हो
ले समझ

मानव जगत
जन जन की आबादी
प्रकृति की है बर्बादी
न मुझे पता
न तुझे खबर

आभा से चमक दमक
ले संज्ञान
भटक मत
बन मत चटक
जाएगा भटक
अनुभव को मार्गदर्शक ले बना
हो भला
हो भला

सिक्का संपूर्ण ही है अपना है,

- डॉ महेंद्र सिंह
मानेसर और रेवाड़ी

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8 वर्ष पहले

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