हमसे आँख मिला के देखो,
ये भरम भी पाल के देखो ।
दूरी में क्या दर्द छिपा है ?
जरा ये भी पता लगा के देखो ।
सुनी शाम के आलम में तुम भी,
कोई पुराना नगमा गा के देखो ।
रात का अँधेरा भले ही घना हो,
ख़ुशी का चराग़ जला के देखो ।
जाग जाग के पूरी उम्र कट चुकी है,
अब नींद में ख्वाब बसा के देखो ।
- माधवी आशरा
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