वो बीते हुए पल
जो साथ गुजरे थे कल
आते जब भी याद हमे
दिल में मचा देते हलचल
वो सुनसान राहों में
तुम्हारी कहीं गई बाते
अचानक घूम जाती है
यादों की निगाहों में
कोई भी बहाना लेकर
वो तुम्हारा मिलने आना
बैठे बैठे ही बिना बात के
साथ में घंटों समय बिताना
भले ही राहें हुई हो अलग
पर यादें कहाँ जुदा होती हैं
हो यक़ीनन भौगोलिक दूरियां
मगर दिल में यादें जिंदा होती हैं
बैठते है जब कभी तन्हा तो
गुजरे लम्हे पास चले आते हैं
रहे भले ही खामोश हम
पर लव खुद ही मुस्कुराते हैं
उससे कोई गिला शिकवा नहीं
उन खूबसूरत पलों का एहसास है
आँखे बंद करो तो लगता है
वो आज भी मेरे ही पास है
— माधव पटेल दमोह
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