दीपक उम्मीद का
जीवन में जलाना है
राह के अंधियारों को
दृढ़ संकल्प से हटाना है
पथ के अवरोधों से
नहीं तुम्हें घबराना है
धीरे धीरे ही सही मगर
अपने कदम बढ़ाना है
पतझड़ के बाद ही तो
निकलती है नई कोंपल
इसी आश से तुम्हें अपने
तय शिखर तक जाना है
— माधव पटेल दमोह
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