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जय वसुंधरा

                
                                                         
                            है ब्रह्मा की रचना सुंदर, सबकी माता वसुन्धरा।
                                                                 
                            
प्रभु चरणों से पावन भूमि जीवन दाता वसुन्धरा ॥ १ ॥

लगती है तू बड़ी मनोहर, कहता हर प्राणी वसुन्धरा।
तेरे लिए हैं सभी बराबर, दे खुशी सभी को वसुन्धरा ॥ २ ॥

खड़े हैं तुझपे ऊँचे पर्वत, बहते झरने वसुन्धरा।
तुझपे बहती पावन नदियाँ, तुझपे सागर वसुन्धरा ॥ ३ ॥

तुझपे फैली वनस्पति है, पशु-पक्षी हैं वसुन्धरा।
सदा रोज तेरे गुण गाऊँ, जयति-जयति जय वसुन्धरा ॥ ४ ॥
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एक घंटा पहले

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