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बारिश में उसका भीगना

                
                                                         
                            भीगे हुए जुल्फ़ों में बारिश की सी नर्मी लिए,
                                                                 
                            
गुलाबी लिबास में वो कोई अधूरी सी कहानी लिए।

बड़ी-बड़ी आँखों में मोहब्बत का ठहरा हुआ सा नूर,
हर एक नज़र में छुपी हुई सी मेहरबानी लिए।

मुस्कुराते लबों ने मौसम को भी बदल दिया,
लब थे या दुआओं की कोई अज़ान पुरानी लिए।

साफ़-सुथरा चेहरा, आईने भी हैरान से रहे,
फ़ितरत की सादगी में पूरे जहाँ की रोशनी लिए।

बरसती हुई बारिश भी ठहर-ठहर के देखती रही,
वो नाच रही थी जैसे गुमाँ आसमानी लिए।

ठहरे हुए बादलों में भी एक हलचल सी छोड़ गई,
दिल के हर कोने में कोई अनकही रवानी लिए।

 
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2 महीने पहले

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