तेरी बाँहों में सिमट कर ऐसा सुकून मिला,
जैसे मुद्दतों से बिखरे हुए दिल को जुनून मिला।
कैसे बयाँ करूँ उस लम्हे की कैफ़ियत को मैं,
जब दिल को मेरे एक ख़ामोश सा आग़ोश मिला।
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